काहे भूल गई माई हमके नयना चुराई के ।
प्रीत लगाई हमके आपन शरण में बुलाई के ।
तोहरी द्वारे माई भक्त जब निहारे ।
आस के चेहरा उम्मीद के सहारे ।
तन-मन में आस दिखाई, जिंदगी बनाई के ।
काहे भूल गई...........
मन में हई विद्या की लालसा, तन में उम्मीद की बयार ।
भाव है बेजोड़ हमरी, बाकी है तेरा प्यार ।
प्यार पूरी न हो पाई ,तोहरा के छोड़ के ।
काहे भूल गई..........
है यही इच्छा हमरी, नाम फैले सारा जग में ।
कोई कोना न हो बाकी, दिखे पग-पग में ।
पग-पग में नाम सुनाई, दिल के हिलोड़ के ।
काहे भूल गई..........