दोस्ती परिचय-
जब हम जन्म लेते हैं तब से ही किसी न किसी रिश्तों की बागडोर में बंधे चले आते
हैं या हम यों कहे कि हम परिवार में विभिन्न रिश्तों की डोर से बंधे होते हैं
लेकिन पारिवारिक रिश्तों के अलावा एक और महत्वपूर्ण रिश्ता हमारे जीवन में काफी
महत्व रखता हैं और वो रिश्ता होता है दोस्ती अथवा मित्र का रिश्ता, जो विश्वास व
सहयोग के आधार पर टिका होता है, जो हर सुख-दुख के साथी होता है... ये सभी रिश्ते
हमारे समाज में सरोकार बनाये रखने के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है...
मित्र,
सखा, दोस्त, फ्रेंड, चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए, दोस्त की कोई एक परिभाषा हो
ही नहीं सकती... इंसान के दो प्रकार के दोस्त होते हैं... पहला वह जो बचपन से
दोस्त होता है, जिसके साथ वो बड़ा होता है और दूसरे प्रकार की दोस्ती वह होती है
जो इंसान को जन्म के बाद में होती है, मतलब स्कूल लाईफ, कॉलेज लाईफ में या
प्रोफेशनल लाईफ में हमें दोस्त मिलते हैं...
कुछ ऐसे भी दोस्त मिल जाते हैं जो कुछ समय
के लिए साथ निभाते हैं और कुछ ऐसे भी दोस्त मिलते हैं जो सारी जिंदगी हमारा साथ
निभाते हैं चाहे सुख हो या दुख वो हमारा कभी साथ नहीं छोड़ते... दोस्ती के बारे
में योहि नहीं कहा गया है कि जिसके जीवन में सच्चा दोस्त नहीं है, उनके जीवन
में सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है...
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दोस्ती क्यो?
सभी तरह के बंधन एवं संकीर्णताओं को तोड़कर
आपस में प्रेम, सम्मान और परस्पर सौहार्द बढ़ाने का संदेश देने वाले इस अनूठे
त्योहार की प्रासंगिकता आधुनिक समय में बढ़ती जा रही है, क्योंकि आज मानवीय
संवेदनाओं एवं आपसी रिश्तों की जमीन सूखती जा रही है, साथ ही रोजी-रोजगार के
भागम-भाग में घर से सैकड़ो किलोमीटर दूर, जहाँ अपने रिश्ते वाले नहीं होते हैं ।
ऐसे समय मे एक दूसरे से जुड़े रह कर जीवन को खुशहाल बनाना और दिल के जादुई
संवेदनाओं को जगाने का रिश्ता दोस्ती ही करती आ रही है...
दोस्ती खून का रिश्ता तो नहीं होती है लेकिन
उससे भी बढ़कर होती है... दोस्ती एक ऐसी चीज होती है जो हमारे हर अच्छे-बुरे काम
में हमारे साथ होती है और हम अपनी पर्सनल बातें हर किसी के सामने शेयर नहीं सकते
लेकिन दोस्त को हम बेझिझक अपने दिल की हर बात बता देते हैं और वह हर बार हमारी हर
बात पर हमारे साथ खड़ा होता है... वास्तव में मित्र उसे ही कहा जाता है, जिसके मन
में स्नेह की रसधार हो, स्वार्थ की जगह परमार्थ की भावना हो...ऐसे मित्र संसार में
बहुत दुर्लभ है.. जैसे कृष्ण और सुदामा और
राम और हनुमान...
“दोस्ती का मतलब एक प्यारा सा दिल,
जो कभी नफरत नहीं करता..
एक प्यारी मुस्कान, जो फीकी नहीं पड़ती,
एक एहसास जो कभी दुख नहीं देता,
और एक रिश्ता जो कभी खत्म नहीं होता..”
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दोस्ती दिवस की शुरुआत:
मित्रता दिवस या दोस्ती दिवस या इसे
फ्रैंडशिप डे कहे, यह दो अनजान लोगों के पहचान को बताती है... यह अगस्त माह के
पहले रविवार को मनाया जाता है... सर्वप्रथम मित्रता दिवस 20 जुलाई, 1958 ई में
पराग्व में डॉ रमन आर्टिमियों द्वारा प्रस्तावित किया गया था.. दोस्ती के बारे में कहा
जाता है कि इंसान अपने परिवार, रिश्तेदारों को नहीं चुन सकता लेकिन वो अपने लिए
दोस्त चुन सकता है...
दुनिया के अलग-अलग देशों में इसे अलग-अलग
दिन मनाया जाता है... 27 अप्रैल 2011 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में 30
जुलाई को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस के रूप में घोषित किया गया जबकि
भारत समेत अन्य देशों में इसे अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है...
जिंदगी के बाकी सभी रिश्तों के साथ हम पैदा
होते हैं पर दोस्ती ही एक मात्र रिश्ता है जिसे हम खुद बनाते हैं.. यह वह रिश्ता
है जो एक दूसरे की मदद के लिए वक्त-बेवक्त हाजिर रहते हैं और जिंदगी की तमाम
मुश्किलों से लड़ने की ताकत और हिम्मत हमें देते हैं..
एक सर्व प्रचलित
बाते हैं-
“दोस्ती कोई खोज नहीं होता,
दोस्ती किसी से हर रोज नहीं होती,
जिदंगी में मौजूदगी उनकी बेवजह नहीं होती,
क्योंकि पलकें आंखों पर कभी बोझ नहीं होती.”
1.
हमारी सबसे बेहतरीन किताब 100 दोस्तों के बराबर होती हैं लेकिन एक बढ़िया दोस्त एक लाइब्रेरी के बराबर होता है- डॉ अब्दुल कलाम
2.
दोस्ती एक बेहतर ही सुखद
जिम्मेदारी है, अवसर नहीं- खलील जिब्रान
3.
जीवन का सबसे बड़ा उपहार
दोस्ती है और यह मुझे सौभाग्य से मिलता है- ह्यावर्ट हम्फ्री
4.
सच्चा दोस्त वहीं होता है
जो तब हमारा साथ देता है जब सब साथ छोड़ देते हैं.
5.
मूर्ख मित्र से बुद्धिमान
शत्रु हर स्थिति में अच्छा होता है.
6.
ज्ञानवान मित्र ही जीवन का
सबसे बड़ा वरदान है.
7.
मित्र वे दुर्लभ लोग होतें
हैं, जो हमारा हालचाल पूछते हैं और उतर सुनने को रूकते भी है.
8.
सच्चा मित्र वह है जो दर्पण
की तरह तुम्हारें दोषोंको तुम्हें दिखाए, जो तुम्हारें अवगुणों को गुण बताए वह तो
खुशामदी है.
9.
तुम्हारा अपना व्यवहार ही
शत्रु अथवा मित्र बनाने के लिए उत्तरदायी है.
10.
अपने मित्र को एकात में
नसीहत दो, लेकिन प्रशंसा खुलेआम करों.
11.
मित्रता करने में धैर्य से काम लो, किंतु जब
मित्रता कर ही लो तो उसे अचल और दृढ़ होकर निभाओ.
12.
दोस्त वो होते हैं, जो हर
समय अपने दोस्त का साथ निभाते है, चाहे दोस्त किसी भी परिस्थिति में हो..
13.
आप भले ही दुनिया की सारी
दौलत लगा लो आप सच्ची दोस्ती नहीं खरीद सकते.. पर जिसके पास सच्चा दोस्त है, वो
दुनिया का सबसे अमीर इंसान है.
14.
विदेश में विद्या मित्र
होता है, घर में पत्नी मित्र होती है, रोगी का मित्र औषधि और मृतक का मित्र धर्म
होता है.
15.
सच्चे मित्र हीरे की तरह
कीमती और दूर्लभ होतें है, झूठे मित्र पतझड़ की पत्तियों की तरह हर कही मिल जाते
हैं.
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