अंधभक्तों की तानाशाही धमकाती है,
गोदी मीडिया की चमचाई दिखाती है।
संघी सरकार की शक्ति जो बढ़ती है,
व्हाट्सएप पर फैलता है जहर सा विचार।
कुछ करवाते हैं वे जो वोटों के लिए,
सत्ता की लालसा में खो जाते हैं।
नैतिकता और इमानदारी भूल जाते हैं,
मुल्यों और संस्कृति को खो जाते हैं।
मीडिया की दुनिया में घूमते फिरते,
सच को दबाकर झूठ को बनाते हैं।
जनता को भ्रम में रखकर रुलाते हैं,
सत्ता के लिए कुछ भी करने को तैयार बनाते हैं।
जिद पर जिद, चलती है सरकार की पारी,
व्यवस्था को नष्ट कर दिया है सारी।
विचारधारा को दबा दिया है बिल्कुल,
तानाशाही रवैए से भरा है यह कारीगरी।
पर सत्य का साया जब उभरेगा,
जनता के मन में उत्साह भरेगा।
विकल्प बनेगा, नए सपने आएंगे,
तानाशाही रवैए के वो दिन ढलेंगे।
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