सुना है फिर एक खत आया है
चुनाव कराने के बावत,
मेरा भी बुलावा आया है ।
आज चुनाव कराना भी एक जंग है ।
नये-नये युवक-युवतियों में काफी उमंग है ।
पर जो-जो प्रत्याशी दबंग है ।
उन सबके कार्यकर्ताओं में छिड़ी एक जंग है ।
पता नहीं ये छिड़ा हुआ जंग,
क्या संदेश लाता है ।
सुना है फिर एक खत आया है ।
चुनाव पर जाने से पहले
बड़ी खामोशी छाँती है ।
शादी-शुदा लोगों को घर की
बहुत याद आती है,
पर जो कुवाँरे होते हैं उनकी
प्रेमिका आरती उतारती है ।
आरती उतारने का ये कैसी
माया है ।
सुना है फिर एक खत आया है
।
बैलेट सिस्टम खत्म हुआ है ।
अब ईवीएम का जमाना है ।
बुथ लुटना, डराना, धमकाना ।
ये खबर बहुत पुराना है ।
पुराने खबरों से हूँ बेखबर,
क्योंकि नया सिस्टम आया है ।
सुना है फिर एक खत आया है ।
कर्मचारी होकर भी हम,
एक दिन के अधिकारी बनेंगे
।
बुढ़ा-बुढ़ी या नौजवान,
सभी मुझे पोलिंग अधिकारी
कहेंगे
अधिकारी बनकर भी हमें,
हाथों में रंग लगाना है ।
सुना है फिर एक खत आया है
।
नोटा पर वोट पड़े या लोटा पर,
हमें अपना कर्तव्य निभाना है ।
हम सरकारी मुलाजिम है
ना हम कोई प्रत्याशी के दिवाना है ।
कोई हारे कोई जीते,
हमें केवल लोकतंत्र को जिताना है ।
सुना है फिर एक खत आया है ।
चुनाव कराने के बावत,
मेरा भी बुलावा आया है ।
जे.पी. हंस
जे.पी. हंस