13 September, 2021

सरकारी नौकरी के 11 साल: कुछ अनछुए यादें. (Part-1) Eleven years of government job of Jai Prakash Narayan or JP HANS



                                                     (11 साल के सफर के साथी मैं कुणाल, दत्ता और विनय)

              13 सिंतबर, 2010, दिन सोमवारमेरे जिंदगी का वह सुनहरा पल जिसका सबको इंतजार रहता है। सरकारी नौकरीहाँ! इसी दिन मैंने सरकारी नौकरी जॉइन किया था। वर्षो के त्यागतपस्यामेहनत और लगन के बदौलत मैंने दिल्ली नगर निगम में क्लर्क के पद का कार्यभार संभाला था। इस विभाग में जॉइन तो मैं कुछ दिन पहले भी कर सकता था पर मेरी माँ अस्पताल में भर्ती थी जिसके वजह से जोइनिंग में देर हो गयी। हमारे कई दोस्त हमसे पहले जॉइन कर चुके थे। मेरा जोइनिंग लेटर घर पर नहीं आया था पर हमें पता था कि जोइनिंग लेटर जारी हो रहा है। मैंने विभाग के केंद्रीय संस्थापना विभाग के कर्मचारियों से मिलकर 11 सितंबर को जोइनिंग लेटर प्राप्त किया और 13 सिंतबर, 2010 को कार्यभार संभाल लिया था।

जोइनिंग के पहले का संघर्ष: 

        मैं 10 सिंतबर को दिल्ली पहुँचा था। इससे पहले दिल्ली दो बारएक बार एग्जाम और एक बार मेडिकल टेस्ट के लिए आया था। समझिये मेरे लिए दिल्ली एक अनजान शहर था। मैं दिल्ली रेलवे स्टेशन से बस पकड़कर लाजपत नगर पहुँचा। लाजपत नगर में हमारे भैया रहते थे। उन्होंने बताया था कि आप लाजपतनगर बस से आ जाइए। लेकिन लाजपत नगर इतना बड़ा होगा यह नहीं मैंने समझा था। बहुत तेजी से बारिश हो रही थीमेरे लाजपत नगर पहुचते-पहुचते करीब छह बजे चुके थे। एक अनजान जगहशाम होने पर था और ऊपर से बारिश छूटने का नाम नहीं ले रहा था। मैं लाजपत नगर वाली बस स्टैंड पर उतराभींगते हुए सामने किसी दुकान में पहुँचा। वहां पहुँचकर भैया को फोन किया। भैया अपने ड्यूटी से आकर लाजपत नगर बस स्टैंड के सामने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास रुके हुए थे पर तेज बारिश के चलते अपने रूम N-38डबल स्टोरीनिर्मलपुरी लाजपतनगर को जा चुके थे। एक अनजान शहरशाम का समयतेज बारिशऊपर से मेरे कीपैड मोबाइल के बैटरी जवाब दे रहा था। भैया बार-बार N-38 डबल स्टोरी आने को बोल रहे थे पर बारिश के चलते साफ सुनाई नहीं आ रही थी। दुकान वाले ने बैग ढकने के लिए एक प्लास्टिक देकर मुझे चलता किया। दुकान वाले मुझे अनजान समझकर ज्यादा देर ठहराना उचित नहीं समझ रहे थे। भैया से बार-बार बात करने से यह बात समझ आ गयी थी कि हमें ज्यादा दूर नहीं जाना है। मेरा पूरा जूता भींग चुका था। लाजपत नगर फ़्लाईओवर के पास पानी जमा हो गया थाजिससे भींगे जूते से चलना मुश्किल हो गया फिर किसी तरह उनके रूम में पहुँचा। डर इसी बात का था कि यह शहर मेरे लिए अनजान थाशाम का समय हो गया थातेज बारिश हो रही थी और मोबाइल के बैटरी खत्म होने के कगार पर था। इस परिस्थिति में अगर भैया के रूम नहीं मिलते तो क्या करता?


       खैरअगले दिन पुरानी दिल्ली टाउन हॉल जाकर केंद्रीय संस्थापना विभाग से जोइनिंग लेटर लिया और सोमवार 13 सितम्बर को वही लाजपत नगर में स्थित MCD के Assessment & Collection Department (House Tax Department) में जोइनिंग दिया। जोइनिंग से पहले अपने मित्र ANIL DUTTA, Uttar Pradesh से मिला जो कि 30 अगस्त, 2010 को MCD के IT सेल में जॉइन किया था। आफिस के जोइनिंग का हालचाल इसी से पता करता था। मजे की बात है कि मैं पहले दिन जब दिल्ली आया था तो उसी ऑफिस के गेट से होकर गुजरा था फिर भी मुझे इस ऑफिस के बारे में पता नहीं चला।


         13 सितम्बर को मेरे साथ एक दोस्त Vinay Kumar, Hajipur, Bihar और दिल्ली के एक Geeta Kumari भी उसी पोस्ट पर जॉइन किया। जोइनिंग के बाद कुछ दिनों के बाद पोस्टिंग मिला था तब तक इधर-उधर घूमकर मौज करते रहे बाद में जब पोस्टिंग हुआ तो मेरा और Geeta Kumari, Delhi को MVC (Municipal Valuation Committee) और Vinay Kumar, Hajipur को DCC (Dishonour Cheque Cell) मिला। 20 सितम्बर को बिहार से एक और क्लर्क जॉइन किया Krishan Kant Kunal. मैंविनय और कुणाल (तीनो बिहारी) मिलकर लाजपत नगर 'गढ़ीमें रहने लगा। बाद में दो दिनों के ट्रेनिंग हुआ जिससे बहुत सारे दोस्त बन गया। नवल किशोरशेखर सुमनजाकिर हुसैनजगदीशराजकुमार. घनश्यामजितेंद्रअभिषेक. कई दोस्तों के नाम भी भूल चुका हूँ क्योंकि मेरे MCD से विदा लेने से पहले दूसरे विभाग में जा चूके थे और कई से अब संपर्क नहीं है।

ऑफिस जोइनिंग के बाद का संघर्ष:

        मुझे और गीता कुमारी को एक ही सेल में पोस्टिंग हुआ। जोइनिंग के बार MVC के PA ने मुझे वहां के कार्य के बारे में बताया कि यह सेंसिटिव जगह हैयहां दिल्ली के कॉलोनियों का categorization होता है। जिससे टैक्स तय होता है। बाहर किसी को मत बतानाअन्यथा नौकरी चली जायेगी। 

        एक दिन बहुत मजेदार हुआ। मेरे एडमिन के Dy A&C. झा सर थे। उनके PA ने अपने चैम्बर में बुलायायह चैम्बर डिप्टी के चैम्बर के आगे था। वहां गीता कुमारी पहले से बैठी थी। डिप्टी के PA ने मुझे बोला कि आपको हिंदी ट्रांसलेट के बारे में जानकारी है सो कुछ मैटर ट्रांसलेट करना हैजबकि मेरा पोस्टिंग MVC में था और क्लर्क के पोस्ट में आया था। मैंने PA को जवाब दियानहीं! 'मुझे नहीं आता है।इतने में PA गुस्सा हो गया, 'गीता तो कह रही है आपको आता है।मैंने कहा जैसे आप DICTIONARY से मीनिंग खोजकर ट्रांसलेट कीजियेगा वैसे ही मैं करूँगा। इतने में PA गुस्सा से लाल हो गया और कहने लगा, 'नया-नया आया है और जबान लड़ता है ओ भी डिप्टी के चैम्बर में।मैंने कुछ नहीं बोला और सीधा अपने सीट पर चला आया और मन ही मन कहा, 'जो करना है कर लोमैं क्लर्क हूँकोई ट्रांसलेटर नहीं।'

         गलत का मतलब गलत होता है। मुझसे गलती बर्दाश्त नहीं होती। जब ऑफिस जॉइन किया तो सभी क्लर्क को आई.डी कार्ड मिलना थाआईडी देने वाला केयरटेकर कुछ पैसा ऐठने के चक्कर में था तब मैंने केयरटेकर के खिलाफ एक लंबा-चौड़ा शिकायती पत्र लिखा जिससे हमारे दोस्त अनिल दत्त ने यह कहकर फाड़ दिया कि अभी-अभी नौकरी जॉइन किया है और पुराने आदमी को शिकायत करोगेकही तुम्हे नुकसान न पहुँचा दे। फिर जैसे-तैसे आईडी कार्ड मिला।

         सभी नए क्लर्को को नौकरी करते हुए एक साल से अधिक समय हो गया था फिर भी सैलरी नहीं मिल रही थी। वजह थी MCD की एक शर्त की जब तक सभी क्लर्को का पोलिस वेरिफिकेशन नहीं हो जाता तब तक सैलरी नहीं मिलेगी। जैसे-जैसे वेरिफिकेशन होकर डोजियर आता वैसे सैलरी चालू हो जाती। मेरा और कई दोस्तों को डोजियर आ गया था फिर भी Establishment Section वाले सैलरी जारी नहीं कर रहे थे तब मैंने डिप्टी इस्टैब्लिशमेंट मैडम पुष्पा सैनी की शिकायत लेकर HOD के पास पहुँच। फिर बाद में सैलरी जारी हुआ।

            कुछ ही दिनों के बाद मेरा ट्रांसफर MVC से डायरी-डिस्पैच सेक्शन में राजकुमारी मैडमसुनीता मैडम के साथ कर दिया गया जहां गंगा सहाय जी MCD के वरिष्ठ व्यक्ति का सानिध्य प्राप्त हुआ। लगभग डेढ़ साल के बाद लाजपतनगर हाउस टैक्स मुख्यालय को नई दिल्ली स्थित सिविक सेन्टर ट्रांसफर कर दिया गया। अब हमलोगों का नया ऑफिस सिविक सेन्टर के 20वाँ फ्लोर पर आ गया। हम तीनों साथियों को प्रतिदिन ऑफिस के लिए लाजपत नगर से नई दिल्ली सिविक सेंटर जाना होता था। सिविक सेन्टर में मेरे साथ सुनीता मैडम और जितेंद्र थाजितेंद्र बाद में GRP सेल में चला गया और सुनीता मैडम आरके पुरम ट्रान्सफर करवा ली। अब मैं इस सेक्शन में अकेला था और लेटर ले जाने के लिए मेरे साथ पांच नोटिस सर्वरगंगा सहायरमेश कुमारगोयल जीसचिदानंद जीएक का नाम याद नहीं।


                                                          (सिविक सेन्टर बिल्डिंग)


                                                (सिविक सेंटर में मेरा वर्क स्टेशन)
                     

कुछ दिनों के बाद MCD का तीन भागों में बंटवारा हो गया। मैं और मेरे दोनों पार्टनर का एड्रेस साउथ दिल्ली में होते हुए हम तीनों का ट्रांसफर पूर्वी दिल्ली नगर निगमपटपड़गंज में कर दिया गया। अब हमलोगों का नया ऑफिस पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज हो गया। हमलोगों ने अपना रूम लाजपत नगर 'गढ़ीसे बदलकर लक्ष्मी नगर में ले लिया।

 

                                                       (बीच में डाढी वाले विनोद सर)

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के हाउस टैक्स में हमारे नए गुरु 'श्री विनोद कुमार शर्माहेड क्लर्क और मार्गदर्शक "शशिधरण केपी" बने। शशिधरण जी जोइनिग से लेकर रिजाईनिंग तक एक मार्गदर्शक की भूमिका में रहे। यो कहूँ की शशिधरण जीदोनों साथी (कुणाल और विनय) और मैडम पुष्पा सैनी एक ही विभाग में रहकर मेरे जोइनिंग से लेकर रिजाइनिंग तक के साक्षी रहे हैं।

                               

(मैं और विनय कुमार)

गलती के लिए विभागीय दंड:

       मैंने 11 साल के कैरियर में कभी जानबूझकर गलती नहीं की। भले विभाग ने मुझे दो बार MEMO (Show Cause) दिया पर यह विभाग के अपनी नाकामियां छुपाने के लिये दिया था। पहली बार जब मेमो दिया गया था और उसमें जिस दिन के घटना का जिक्र था उस दिन मैं उपस्थित था ही नहीं इसलिए मेरा मेमो खारिज हुआ

        दूसरा मेमो मेरे जोइनिंग के पहले के किसी लेटर के लिए दिया गया था जिससे मुझे कार्यभार संभालने के बाद सहेजने के लिये मिला ही नहीं था। इस तरह दोनों मेमो से मैं मुक्त हुआ।
पहले और दूसरे मेमो की कहानी भी 2012 से 2014 के बीच ही है उसके बाद आज तक कोई SHOW CAUSE या मेमो नहीं मिला।

        मैंने 07 फरवरी, 2014 को पूर्वी दिल्ली नगर निगम के क्लर्क पद से त्याग-पत्र देकर10 फरवरी, 2014 को इनकम टैक्स विभाग, बिहार एवं झारखंड में स्टेनोग्राफर का पद ज्वाईन किया.













अंत में एक यादगार विडियो.



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