सुविचार

होली के शुभ अवसर पर शब्द क्रान्ति की तरफ से हार्दिक बधाई एवं नव वर्ष की शुभकामनाये । ...

11 नवंबर 2017

सदाबहार-3

जिस हाल में हूँ उस हाल में रहने दो।
हाथो मे चाकू न दो कलम भी रहने दो।
सताया हूँ इस कदर उसके दिल का।
जितना बहना है आँसू बहने दो।
                  जेपी हंस

सदाबहार-2

कभी रेत पर लिखी थी हम दोनों की जिंदगानी।
आँधियाँ आई, तूफान आया मिट गयी निशानी।
मुलाकातों को दौर चलता है चलता भी रहेगा।
बस होंठो में मुस्कान और लेकर आंखो में पानी।
                            जेपी हंस

10 नवंबर 2017

सदाबहार-1

स्मार्टफोन की इस दुनिया में,
कैसा कैसा भूकंप आता है।
घर परिवार में अगर मचे भूकंप तो,
मोदी से पहले ट्रम्प को पता चल जाता है।
                                    जेपी हंस

11 मई 2017

सपने थे हजार (गजल)



सपने थे हजार उनके मन में,
पर कोई उजाला ला न सका ।
भटकता रहा दर-दर पगडंडियों पे,
पर कोई सामने आ न सका।
हजार रास्ते बनाये रहमो-करम ने,
पर कोई रास्ता पहुँचा न सका ।
ढोता रहा सपनों का बोझ,
पर कोई उसे उठा न सका ।
सहता रहा हजार जुल्मों-सितम,
पर कोई कहर का जवाब दे न सका ।
सपने थे हजार उनके मन में,
पर कोई उजाला ला न सका ।


काश तु मिलती (गजल)





काश तु मिलती तो एक दिन ।
आखें फड़फड़ाके कहती है ।
दो जिस्म एक जान होती ।
धड़कने  पुकार कर कहती है ।
झुठ नहीं बोलती वो नयन ।
जो गिड़गिड़ा के कहती है ।
जग जाहिर ही होते है वो ।
सपने जिनके कामयाब होती है ।
आँखों के आसुँ से भर गये गागर ।
गागर की लहरे उफान भरके कहती है ।
काश तु मिलती तो एक दिन ।
आखें फड़फड़ाके कहती है ।