चांद की ओर मत देखना
मत देखना सपने
लम्बी उड़ान की।
मत जिद करना
चांद पर जाने की।
मत सोचना
तार्किक बातें
ज्ञान और विज्ञान की।
मत दौड़ना लंबी दौड़
जिंदगी में भाग-दौड़ की।
मत देखना उम्मीदों से
चांद की ओर
हौसला पाने की।
तुम्हारा उम्मीदे देखना,
सपने पालन,
लंबी छलांग,
जिद करना,
ज्ञान व विज्ञान की बाते करना
ये सब तरक्की है क्या?
ये सब साजिशो का ही तो हिस्सा है
किसी विदेशी मुल्क के।
जो नहीं चाहता
हिंदुस्तान तरक्की करें।
एकता में रहे।
हिंदुस्तान तो
तरक्की कर ही रहा।
जहां केवल
एक की ही एकता है।
जहां
एक राष्ट्र,
एक धर्म,
एक भाषा,
एक संस्कृति,
एक वर्ण,
एक जाति,
एक वर्ग,
एक संस्था,
का एकाधिकार है
या
के लिए नियमावली बन रही।
तुम्हारे सपने देखने से
एक का द्वि (दो)
होना
एकता है क्या?
तरक्की है क्या?
भले एक और एक
द्विज हो
एकता और तरक्की
कहलाता हैं।
*द्विज- जिसका दो बार जन्म होता है।
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