प्रीत लगाई हमके आपन शरण में बुलाई के ।
तोहरी द्वारे माई भक्त जब निहारे ।
आस के चेहरा उम्मीद के सहारे ।
तन-मन में आस दिखाई,
सबके जिंदगी बनाई के ।
काहे भूल गई...........
मन में हई विद्या की लालसा,
तन में उम्मीद की बयार ।
भाव हई बेजोड़ हमरी,
बाकी हई माँ तेरा प्यार ।
प्यार पूरी न हो पाई ,
तोहरा के छोड़ के ।
काहे भूल गई..........
है यही इच्छा हमरी,
नाम फैले सारा जग में ।
कोई कोना न हो बाकी,
दिखे पग-पग में ।
पग-पग में नाम सुनाई,
दिल के हिलोड़ के ।
काहे भूल गई.......... -जेपी हंस