जेपी डायरी
मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में व्यक्त करने का एक प्रयास.
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23 July, 2019
मेहंदी
मेहंदी
मेरे नाम की लगने वाली थी।
फूल सपनों की खिलने वाली थी।
बीत गयी सोलह सावन देखते-देखते,
आज उनके घर पराये
की
शहनाई बजने जा रही थी।
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