एक बार रवि ट्रेऩ से सफर
कर रहा था । बगल की सीट पर दो लड़किया बैठी थी । देखने में काफी अच्छे घराने की लग
रही थी । ट्रेन में लम्बी सफर में बातचीत के दौरान रवि को पता चला कि दोनों
लड़कियाँ मेडिकल कॉलेज में पढ़ने के लिए किसी दूसरे शहर में जा रही है । एक ने
अनिता तो दूसरे ने सुनिता नाम बतायी । दोनों लड़किया सफर के दौरान गप्पे मारती हुई
तरह-तरह के फूड खा रही थी । जैसे ही ट्रेन अगले स्टेशन पर रुकी । सुनिता और अनिता
प्लेटफार्म से उतरी । इन दोनों को उतरते ही दो-तीन अनजान लड़का-लड़कियों की भीड़
उसके पास मँडराने लगी । देखने में कम उम्र के ये बच्चे बेहद गरीब परिवार के लग रहे
थे । फटे पुराने कपड़े पहने ये दोनों लड़कियों से अपनी मुँह की तरफ इशारा करके कुछ
खाने के लिए पैसे की मांग कर रही थी । सुनिता और अनिता द्वारा बार-बार मना करने के
बावजूद वे कभी पैर पकड़ लेती तो कभी हाथ । किसी तरह ये दोनों लड़कियाँ स्टॉल से
खाने की सामान लेकर खाने में मशगुल थी । तभी ट्रेन की सीटी बजी, आधा खाना खायी और
आधा प्लेटफार्म पर फेककर ट्रेन पर चढ़ गई । प्लेटफार्म पर खड़ी लड़के-लड़कियाँ जो
सुनिता और अनिता से पैसे मांग रही थी, वह प्लेटफार्म पर फेके गए खाने के सामान को
उठाकर खाने लगी और सुनिता और अनिता की तरफ कातर नेत्रों से निहार रही थी, तभी
ट्रेन खुल गई ।