डियर ऑफिस बहुत याद आती है
तेरी
वो ऑफिस पहुँचकर
सबको दुआ-सलाम करना,
बगल में लगे,
माँ सरस्वती को चरण स्पर्श
करना,
आई.टी.बी.ए पर वर्क करना,
कितना अच्छा लगता था न ।
पानी की बोतल उठाकर,
गटक-गटक कर पीना,
कभी कैंटीन निकल जाना,
चाय ऑफि में रहते हुए भी,
बाहर जाकर चाय पीना,
कितना अच्छा लगता था न ।
फिर दोस्तों के साथ लंच
करते-करते
गप्पे करना
काम के लिए,
कभी उस साहब के पास,
तो कभी इस साहब के
पास जाना ।
कितना अच्छा लगता था न ।
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जेपी हंस