वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
थी
इतनी छोटी सी उम्र ।
किया क्या था उसने जुर्म ।
अगर
जुर्म उसने नहीं किया ।
क्यों
फिर ऐसा बदला लिया ।
वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
पढ़
रहा था पाठ जीवन में,
इंसानियत
और सच्चाईयों का ।
फिर
क्या समझकर तुने,
तरफदारी
किया बुराईयों का ।
वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
कर
दिया उनको किनारा,
सच्चाईयों
की राह से ।
दरिंदों
को मजबुती मिली है,
बुराईयों
की स्याह से ।
वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
अगर
सियासत में खोट है,
तो
क्या करेंगा ये चाँद तारा ।
सोचा
था हमने एक दिन,
लाएंगे
अमन और भाईचारा ।
वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
ये
जमीं है तेरी,
ये
वतन है तेरा ।
इस
तन पे लिपटे,
कफन
भी है तेरा ।
वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
एक
दिन निकलना था,
घर-गली
से बैंड-बाजा ।
उन्हीं
गलियों से आज,
क्यों
निकला है जनाजा ।
वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
मरने
के बाद भी इंसानियत जज्बा हमारा,
बुराईयों
का नाश ही है शपथ हमारा ।
हिम्मत
और इंसानियत भरी हो,
अगर
देना इस धरती पर जन्म दूबारा ।
वो
जन्म देने वाले,
क्यों
बे-मौत दे डाला ।
तेरा
ही सपूत था,
क्यों
जीवन रौंद डाला ।
जे.पी.हंस
जे.पी.हंस