साथियों लड़ना होगा, हमें लड़ना होगा
मिलती रोटियां जब छीन जाती हाथों से।
फुसलाये जाते हो मीठी-मीठी बातों से।
इंकलाब का नारा अपना गढ़ना होगा।
साथियों लड़ना होगा, हमें लड़ना होगा।
जिंदगी गुजर रही जुल्मों को सहते हुए।
पुरखे खाये थे हमारे, गोलिया लड़ते हुए।
अब हमें ही तीर-कमान पकड़ना होगा।
साथियों लड़ना होगा, हमें लड़ना होगा।
जब आती है हको को मिलने की बारी।
जाति-धर्मो में उलझाने की करते तैयारी।
हर भेड़- चाल उनकी समझना होगा।
साथियों लड़ना होगा, हमें लड़ना होगा।
-जेपी हंस (www.jphans.in)
[जेपी डायरी एक स्वतंत्र ब्लॉग है, इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित
ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. जेपी डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार
हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, फेसबुक पेज, ट्विटर पर फॉलो करे…]
यथार्थ ! आह्वान करता सार्थक सृजन
ReplyDeleteसहृदय आभार.
Deleteसहृदय आभार मैडम... आपको भी स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई.
ReplyDeleteaap bahut achcha likhte hein .aese hi likhte rahiye aap zarur kamyaab honge .God bless you
ReplyDelete