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26 फ़रवरी 2016

पोमपोर की घटना पर कायराना हरकत



आप जो तस्वीर देख रहे है वह 24 फरवरी, 2016 के दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण की कटिंग है ।
      जिसमें 23 फरवरी को जम्मू के पोमपोर के एक इमारत में छिपे आतंकियों पर हुई कार्रवाई  का जिक्र है । साथ ही इस कटिंग में जो बातें पढिएगा उससे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएगा ।
      जी, हाँ दोस्तों, मैं उस बात का जिक्र कर रहा हूँ जिसमें हमारे भारतीय सेना जान जोखिम में डाकर सौ से ज्यादा लोगों को उस इमारत से बाहर निकाला जिसमें आतंकी छिपे थे । सेना ने आतंकियों को मार गिराया । उक्त कार्रवाई में हमारे जाबाज सैनिक भी शहीद हुए, लेकिन वहाँ के कुछेक नवयुवकों ने सैनिक बल पर पत्थर फेके साथ ही आसपास स्थित बहुत से मस्जिदों से पाकिस्तान के समर्थन में नारे भी लगाए गए ।
     वाह, यह कौन सा देश है, जिसके सैनिक आपके लिए जान देने के लिए तैयार रहे और आप उलटे उसे हतोत्साहित करें और पथवार करें । हमारे देश में इस तरह की घटना को कुछेक नवयुवकों की भ्रमित मानसिकता बताकर छोड़ दिया जाता है । मस्जिदों से सेना को हतोत्साहित करने वाले नारे लग रहे थे । क्या उसपर कोई कार्रवाई होगी ? होगी भी नहीं क्योंकि इस तरह की बातों को विचारों की अभिव्यक्ति कहा जाता है ।
      अगर बचाव में कोई सैनिक हवाई फायरिंग करता है और किसी नागरिक की मौत हो जाती है तब तो हमारे देश के ढपोरसंखी सेकुलर जमात के लोग छाती पीट-पीट कर विधवा विलाप करेंगे, क्योंकि वे उनके वोट बैंक है । वो देश के साथ कुछ भी करे सब माफ है । किसी राजनेता ने तो यहाँ तक कहा है कि सैनिक तो सीमा पर मरने के लिए जाते हैं । यह कोड़ा बकवास है । हाँलाकि यह बात सच है कि इंसान तो जन्म ही इसलिए लेता है कि उनका एक दिन मृत्यु जरूर होगा, लेकिन कायरों की भाँति नहीं, वीर शहीदों की भाँति। अगर किसी भी देश में सबसे ज्यादा विश्वास रहता है तो वह सरकार से ज्यादा सेना पर होता है । सेना बल किसी भी परिस्थिति में हमारे मदद के लिए तैयार रहता है अगर इसी तरह आतंकियों को महिमामंडित किया जाता रहा तो वह दिन भी दूर नहीं होगा जब पूरा भारतवर्ष आतंकियों को गढ़ बन जाएगा ।
     तभी मेरे मन से यही उद्गार उत्पन्न होता है ।
न हमें डर है मस्जिद के इन नारों से,
न हमें डर है तिरगे के बदले लहराने चाँद तारों से,
न डर है नेता जी के आरोप-प्रत्यारोप के वारों से,
हमें तो डर है देश में छिपे छद्म ढपोरसंखी गद्दारों से ।
                                                                                                                                           
हमें न नक्सलवाद प्यारा है और न हमें तेरे ढपोरसंखी सेकुलरवाद प्यारा है ।
हमारे रगों में जिसका बहता है खून, उस मातृभूमि का राष्ट्रवाद प्यारा है ।

                                    जय हिन्द
                                    जेपी हंस


5 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " परमार्थ से बड़ा सुख नहीं - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. आपने हमारे ब्लॉग पर कीमती समय देकर हमें प्रोत्साहित किया इसके लिए बहुत बहुत आभार....

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  3. ब्लॉग बुलेटिन में हमारी लेखनी को शामिल करने के लिए ब्लॉग बुलेटिन संचालक को बहुत बहुत आभार...इसीतरह हौसला बढ़ाते रहे...

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