#कॉपी_पेस्ट
आराम करो महाशय जी
गरम रजाई को ओढ़ ।
समझ गए नहीं दे पाओगे
तुम जवाब मुँह तोड़ ।।
गरम रजाई को ओढ़ ।
समझ गए नहीं दे पाओगे
तुम जवाब मुँह तोड़ ।।
बर्दास्त नहीं अच्छे दिनों में
घुट घुट कर यूं जीना ।
आर्टिफीशियल लगता है
वो छप्पन इंची सीना ।।
घुट घुट कर यूं जीना ।
आर्टिफीशियल लगता है
वो छप्पन इंची सीना ।।
मरते जाएँ सैनिक अपने
देते रहे यूं शहादत ।
फर्क नहीं पड़ता तुम्हे
यह है तुम्हारी आदत
देते रहे यूं शहादत ।
फर्क नहीं पड़ता तुम्हे
यह है तुम्हारी आदत
मंचो पर जब भी आते
झूठी हुंकार भरते हो ।
पता नहीं क्या है मन में
बस मन की बातें करते हो ।।
झूठी हुंकार भरते हो ।
पता नहीं क्या है मन में
बस मन की बातें करते हो ।।
प्रेमपत्र तुमने भी भेजे
कर ली खूब मुलाकातें ।
तुमने हाथ मिलाया खूब
पर उसने मारी लातें ।।
कर ली खूब मुलाकातें ।
तुमने हाथ मिलाया खूब
पर उसने मारी लातें ।।
अब भी खून न खौला हो तो
फिर से एक दौरा कर लो ।
रह गया हो बाकी कुछ तो
फिर से अपनी छाती भर लो ।।
फिर से एक दौरा कर लो ।
रह गया हो बाकी कुछ तो
फिर से अपनी छाती भर लो ।।
ट्विटर पर हुंकार लो फिर से
शब्दों के तीर छोड़ .....।
समझ गए नहीं दे पाओगे
तुम जवाब मुँह तोड़ ।।
-अज्ञात
शब्दों के तीर छोड़ .....।
समझ गए नहीं दे पाओगे
तुम जवाब मुँह तोड़ ।।
-अज्ञात
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