जमशेदपुर शहर के मशहूर टीवी कलाकार प्रत्यूषा बनर्जी का असमय गुजरने पर जमशेदपुर शहर में रहने वाले जेपी हंस की कलम भला कैसे चुप रह सकता । प्रस्तुत है एक गजल।
कम उम्र की जिंदगी मे कोई दीवाना न होता।काश ये जिंदगी बीच छोड़कर जाना न होता।
बहुत काँटे है जिंदगी के इस सफर में।
हर कांटों पर गुजरना सबको गवारा न होता।
वादे किये थे बहुत जहां सवारने को ।
इस तरह छोड़ने से उजाला न होता।।
चाहने वालों के दिल पर चर्चा है आपकी।
काश इनके सपनों को कोई सवांरा होता।
गम छाए है बहुत इस शहर में।
काश दुबारा जन्म लेकर यहाँ आना होता।
-जेपी हंस
बहुत काँटे है जिंदगी के इस सफर में।
हर कांटों पर गुजरना सबको गवारा न होता।
वादे किये थे बहुत जहां सवारने को ।
इस तरह छोड़ने से उजाला न होता।।
चाहने वालों के दिल पर चर्चा है आपकी।
काश इनके सपनों को कोई सवांरा होता।
गम छाए है बहुत इस शहर में।
काश दुबारा जन्म लेकर यहाँ आना होता।
-जेपी हंस