भूला दिया है तुझको खुद से मैं
बस यही झूठ बोलता हूँ।
डूबी होगी यही इश्क की नाव हमारी
यही सोचकर मैं दिल की समंदर को
हर रोज टटोलता हूँ।
की गलतियां बेशक मेरी थी
तूने मेरा हाथ बीच मझधार छोड़ दिया।
अरे भरोसा तुझपर इतना कर बैठा
मैंने तो तुझे मोहब्बत दी,
बदले में तूने कुछ और दे दिया।
की सारा जमीर ईमान किनारे करके
तेरी हर तमन्ना पूरी की
सीने से करेजा निकाल
तेरे कदमों पर रख दिया था
और बता तुझे क्या चाहिए था
किसी की जिंदगी से हर रंग छीनकर
हाथों में मेहंदी कैसे लगा पाते हो।
बस एक बात का जवाब दे दो
की आइने के सामने खड़े होकर
खुद से कैसे नजरें मिला पाते हो।
भींगते थे कभी तेरे साथ बारिश में कभी
ओ बरसात का मौसम कितना अच्छा लगता था।
अरे किसी के खोखले किये हुए वादे
कितना सच्चा लगता था।
आंखों में बंधी थी तेरे नाम की पट्टी
तूने मेरा नाता जब दर्द से जुड़वा दिया
तूने मेरा साथ क्या छोड़ा
की मेरा खुद के खुद से रिश्ता भी तुड़वा दिया।
की किसी के सपनो को पैरो से रौंदकर
आंखों में सुरमा कैसे लगा पाते हो
बस एक बात का जवाब दे दो
की आइने के सामने खड़े होकर
खुद से कैसे नजरें मिला पाते हो।
की तुझे जितना मैं जान सका हूँ।
की किसी के साथ उम्र भर साथ निभाने का
वादा भी तूने कर लिया होगा।
बस इस बार इतनी भी तहजीब रखना
की उसके साथ मेरे जैसा सलूक न करना।
की उसने भी तुझे आँखो में भर लिया होगा
की आबाद रहे, गुलजार रहे तू
दुआ मैं इतनी करता हूँ
तेरे साथ मेरा नाम न जोड़ दे कोई
तुझसे मैं इतना डरता हूँ।
मुहब्बत में पड़े लोगों को मेरी सलाह है
की अपनी जिंदगी को सुनसान ढलानों पे
मत मोड़ लेना।
अरे किसी के करीब तो आना पर
इतना भी नहीं की रूह तक से जोड़ लेना।
की तुझसे मेरा आखिरी सवाल है
की जिस्म तो छोड़ो रूह तक से कैसे दगा कर जाते हो।
बस एक बात का जवाब दे दो
की आइने के सामने खड़े होकर
खुद से कैसे नजरें मिला पाते हो।
न पूछो आंखों से उसके लिए अश्क बहाना कैसा था।
होती रही गुफ्तगू और कटती रही राते
न पूछो हाल-ए-दिल बताना कैसा था।
और उसके बच्चे भी लिपट जाते है मामा-मामा कहकर
अरे इन बच्चो की माँ भी कुछ युही लिपट जाती थी
शरमाकर, नजर झुकाकर,
अरे न पूछो उसका अंदाज कातिलाना और साल पुराना कैसा था।
-G Talks से संभार।