26 March, 2020

कैद में मौज

यू ही खाली नहीं है दूर-दूर की सड़कें,
कोरोना का खौफ सब के जेहन में है।
कल जो एक-दूसरे को कत्ल को उतारू थे,
वे भी कोरोना के डर से घर में कैद है।

यू तो नहीं देखा ऐसा बंदी किसी जमाने में।
शहर-दर-शहर बंद है इंसान को बचाने में।
तकलीफ होती है घर पर रहकर बर्तन मांजने में,
टूटने दो लॉकडाउन, देखना, कितनी भीड़ जुटती है पउआ के दुकानों पे।

आशिको के जख्मों का हिसाब कौन करेगा।
निठल्ला बैठा हूँ घर पे हाल-ए-बया कौन करेगा।
इस लॉकडाउन में रिचार्ज के दुकान भी बंद है,
होती थी दिन भर बातें बिन-बात के कौन मरेगा।
                                -जेपी हंस

07 March, 2020

इतनी आसानी से तो मै तुझे भूला भी नहीं सकता।



खो भी नहीं सकता तुझे और पा भी नहीं सकता।
किस कशमकश में उलझा हूँ तुझे बता भी नहीं सकता।
छुपा भी नहीं सकता और बता भी नहीं सकता।
है कितना दर्द सीने में किसी को बता भी नहीं सकता।
हर मोड़ पर टकराएगी तुझसे यादें मेरी
इतनी आसानी से तो मै तुझे भूला भी नहीं सकता।

बड़ी शिद्दत से चाहा था मैंने तुझे,
इतनी आसानी से तो भूला नहीं सकता।
चाहे तेरा प्यार झूठा था,
पर मेरे सच्चे प्यार का तू कर्ज कभी चुका भी नहीं सकता।
तेरे दिल में बोझ बनकर रहूंगा।
तेरे याद में हर रोज बनकर रहूंगी।
जिंदगी से तो निकाल दिया मुझे पर दिल से कभी निकाल नहीं पाओगे।
जब दर-बदर तुझे भी धोखे मिलेंगे
तो तू खुद भी संभाल भी नहीं पाएगी।
जैसे मुझे चुप कर दिया करता था,
अब तू मेरे तरह किसी और को समझा भी नहीं सकता
इतनी आसानी से तो मैं तुझे भुला नहीं सकता।

चाहे कुछ भी कह देते है
पर दिल से आज भी तेरे खुशियों की दुआ मांगते है।
अब तो हम अपना हाल-ए-दिल किसी को सुना भी नहीं सकता।
पर इतनी आसानी से तो मैं तुझे भुला भी नहीं सकता। 
                                        -गूंज चांद