देता हूँ श्रद्धांजलि
करता हूँ कोटी-कोटी नमन ।
कैसे भूल पायेगा जो
खिलाये आपने हिन्द में चमन ।
जगाया है जो आपने जन-जन
में विश्वास ।
यही बात आपको बनाता है
सबके खास ।
सर्व-धर्म-स्वभाव का जब
आपने रखा ख्याल ।
बुद्धि, विवेक और कर्म से हिन्द को किया निहाल ।
नयन चक्षु प्लावित हुआ
जब आपने जग छोड़ा ।
अन्तिम मिलन के खातिर
सबने जाति-धर्म तोड़ा ।
जो दिया आपने नवयुवको
को सफलता का मंत्र ।
बदल जाता है इससे जीवन
का सारा तंत्र ।
मानते है सब आपको जीवन
का प्रेरणास्त्रोत ।
कर्मों और विचारों से
आपके होते है सब ओत पोत ।
व्यक्तित्व, कृतित्व और सादगी ये है आपकी पहचान ।
हिन्द नहीं भूल पायेगा
जब तक रहेगा धरा-आसमान ।