11 November, 2017

सदाबहार-3

जिस हाल में हूँ उस हाल में रहने दो।
हाथो मे चाकू न दो कलम भी रहने दो।
सताया हूँ इस कदर उसके दिल का।
जितना बहना है आँसू बहने दो।
                  जेपी हंस

सदाबहार-2

कभी रेत पर लिखी थी हम दोनों की जिंदगानी।
आँधियाँ आई, तूफान आया मिट गयी निशानी।
मुलाकातों को दौर चलता है चलता भी रहेगा।
बस होंठो में मुस्कान और लेकर आंखो में पानी।
                            जेपी हंस

10 November, 2017

सदाबहार-1

स्मार्टफोन की इस दुनिया में,
कैसा कैसा भूकंप आता है।
घर परिवार में अगर मचे भूकंप तो,
मोदी से पहले ट्रम्प को पता चल जाता है।
                                    जेपी हंस