छटा धुंध कुहासा हटी
फागुनी रूप निखराई है।
प्रकृति दुलहनि रूप धरकर
स्नेह सुधा बरसाई है ।
हमारी नव वर्ष आई है।
फागुनी रूप निखराई है।
प्रकृति दुलहनि रूप धरकर
स्नेह सुधा बरसाई है ।
हमारी नव वर्ष आई है।
शस्य- श्यामला धरती माता
घर-घर खुशहाली लाई है।
चैत- शुक्ल की प्रथम तिथि
नव तरंग फैलाने आई है।
हमारी नव वर्ष आई है।
घर-घर खुशहाली लाई है।
चैत- शुक्ल की प्रथम तिथि
नव तरंग फैलाने आई है।
हमारी नव वर्ष आई है।
मरु तरु श्रृंगारित होकर
बहारे आँचल में फागुन आई है।
आर्यावर्त की पावन भूमि पर
होली की तान सुनाई है।
हमारी नव वर्ष आई है।
- जेपी हंस
बहारे आँचल में फागुन आई है।
आर्यावर्त की पावन भूमि पर
होली की तान सुनाई है।
हमारी नव वर्ष आई है।
- जेपी हंस
होली और नव वर्ष की आपको और आपके पूरे परिवार को हार्दिक बधाई....
होली की शुभकामनाएं।
ReplyDeleteअसीम आभार...
Deleteब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " ब्लॉगर होली मिलन ब्लॉग बुलेटिन पर “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
ReplyDeleteधन्यवाद जी...
ReplyDeleteसुंदर प्रस्तुति।
ReplyDeleteNice post keep posting keep visiting kahanikikitab.com
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