भांति-भांति और
नाना प्रकार की
माता गढ़ने की होड़।
जब हर इंसान को
जन्म देने वाली
"माता" होती ही है।
इंसान का जन्म
इंसान ही देती है,
यह सार्वभौम सत्य हैं,
इंसान का जन्म
कोई जानवर, पशुपक्षी
भूखंड या कोई वायरस
जन्म नहीं देता।
तो फिर गाय माता,
भारत माता और
और अब नई माता
"कोरोना माता" को अवतार
लेने की जरूरत क्यों?
किसी चीज की,
पवित्रता अपनी जगह
हो सकती है लेकिन
दूसरी माता के सत्कार
के चक्कर में,
अपनी जन्म देने वाली
माता को उचित
सेवा-सत्कार देकर
वृद्धाश्रम जाने से
कब रोकेंगे हम?
फोटोः www.dainikbhaskar.com से संभार..
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