31 July, 2023

दुखी हृदय का आह्वान

उदासी से भरा आंचल, 
व्यथित मन का संचार, 
छिन्न-भिन्न सपनों की, 
क्यों है यह बहार?

विरही रूह की दस्तक,
आंखों में आंसू की तार, 
छिपी हैं ये धधकनें, 
क्यों है यह बहार?

क्या है यह ख्वाबों का जहां, 
जहां नहीं रंग उधार, 
तड़पती रूह की लगन,
क्यों है यह बहार?

क़ैदी सी जिंदगी के फंदे में
अटका है आकार, 
क्यों नहीं छूट पाता,
यह कश्मकश बहार?

धुंधली सी राहों में,
खोया अपना इज़हार,
कैसे मिलेगा उसको,
सपनों का यह बहार?

पीड़ित जीवन की तालाश,
दर्द भरी खोज बहार,
मिले न सफलता को,
कैसे बदलूं यह बहार?

लेकिन ज़िंदगी के सफर में
छुपा है समाधान का उधार,
संयम और सहनशक्ति की छाप,
नई बना रहेगा यह बहार।

वर्तमान सरकार की तानाशाही रवैए पर कविता:

अंधभक्तों की तानाशाही धमकाती है,
 गोदी मीडिया की चमचाई दिखाती है।
 संघी सरकार की शक्ति जो बढ़ती है, 
 व्हाट्सएप पर फैलता है जहर सा विचार।
 
कुछ करवाते हैं वे जो वोटों के लिए,
सत्ता की लालसा में खो जाते हैं।
नैतिकता और इमानदारी भूल जाते हैं, 
मुल्यों और संस्कृति को खो जाते हैं।

मीडिया की दुनिया में घूमते फिरते, 
सच को दबाकर झूठ को बनाते हैं।
जनता को भ्रम में रखकर रुलाते हैं,
सत्ता के लिए कुछ भी करने को तैयार बनाते हैं।

जिद पर जिद, चलती है सरकार की पारी,
व्यवस्था को नष्ट कर दिया है सारी। 
विचारधारा को दबा दिया है बिल्कुल, 
तानाशाही रवैए से भरा है यह कारीगरी।

पर सत्य का साया जब उभरेगा, 
जनता के मन में उत्साह भरेगा। 
विकल्प बनेगा, नए सपने आएंगे, 
तानाशाही रवैए के वो दिन ढलेंगे।