मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में व्यक्त करने का एक प्रयास.
आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन पठानकोट और मालदा जैसा अब स्वीकार नहीं - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...
शिवजी सा नीलकंठ मैं हूँवक्त पड़े तो उठा लूँगा संसार! बहुत अच्छी लगी कविता आपकी आदरणीय जे पी हंस जी!
Bahut badia
बहुत बढ़िया .
आप सभी का हार्दिक आभार...
अपना कीमती प्रतिक्रिया देकर हमें हौसला बढ़ाये।
आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन पठानकोट और मालदा जैसा अब स्वीकार नहीं - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...
ReplyDeleteशिवजी सा नीलकंठ मैं हूँ
ReplyDeleteवक्त पड़े तो उठा लूँगा संसार!
बहुत अच्छी लगी कविता आपकी आदरणीय जे पी हंस जी!
Bahut badia
Deleteबहुत बढ़िया .
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