03 फरवरी को संत रविदास की जयंती है । संत रविदास को रैदास के नाम से भी जाना जाता है । 14वीं शताब्दी में जन्में इस संत ने अपने समय में समाज में फैली जाति-पांति, धर्म, छुआछूत, पाखंड, अंधविश्वास आदि बुराईयों को दूर करने के लिए अनेक भक्तिमयी रचनाएं लिखीं । अपने उपदेशों द्वारा लोगों को पाखंड एवं अंधविश्वास को छोड़ कर सच्चाई के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया । उन्होंने ही मन चंगा तो कठौती में गंगा का संदेश देकर लोगों को सर्वप्रथम कर्म की प्रधानता बतलाया ।
इनके जयंती के अवसर पर शब्द क्रांति के द्वारा प्रस्तुत है एक कविता ।
मन चंगा तो कठौती में गंगा ।
कह गए संत रविदास ।
ये वचन क्यों तु भूल गया ।
डूब के बन गया भोग विलास।
पाखंड, अंधविश्वास और बुराइयाँ छो़ड़ ।
सच्चाई के पथ पर चलना ।
कर्म पूरी लगन से कर ।
परिश्रम से कभी भी न डरना ।
ये जाति-पांति, धर्म, छुआछुत ।
किसी मन में विपदा न खाए ।
खोरहर करें इस तन-मन को
सो मिट्टी में जल्दी मिल जाए ।
राम, रहीम और गुरुनानक ।
सब एक ही का है नाम ।
ईश्वर भक्ति के पचड़े में न पड़कर ।
मिलजुलकर करै सब अपना काम ।
वेद, कुरान, बाईबिल, गुरुगंथ में ।
एक ही ईश्वर का है गुणगान ।
धर्म-कर्म के लफड़े में न पड़कर ।
इनके विचारों से करै स्नान ।
मन चंगा तो कठौती में गंगा ।
कह गए संत रविदास ।
इनके जयंती के अवसर पर शब्द क्रांति के द्वारा प्रस्तुत है एक कविता ।
मन चंगा तो कठौती में गंगा ।
कह गए संत रविदास ।
ये वचन क्यों तु भूल गया ।
डूब के बन गया भोग विलास।
पाखंड, अंधविश्वास और बुराइयाँ छो़ड़ ।
सच्चाई के पथ पर चलना ।
कर्म पूरी लगन से कर ।
परिश्रम से कभी भी न डरना ।
ये जाति-पांति, धर्म, छुआछुत ।
किसी मन में विपदा न खाए ।
खोरहर करें इस तन-मन को
सो मिट्टी में जल्दी मिल जाए ।
राम, रहीम और गुरुनानक ।
सब एक ही का है नाम ।
ईश्वर भक्ति के पचड़े में न पड़कर ।
मिलजुलकर करै सब अपना काम ।
वेद, कुरान, बाईबिल, गुरुगंथ में ।
एक ही ईश्वर का है गुणगान ।
धर्म-कर्म के लफड़े में न पड़कर ।
इनके विचारों से करै स्नान ।
मन चंगा तो कठौती में गंगा ।
कह गए संत रविदास ।