सुविचार

नव वर्ष के शुभ अवसर पर शब्द क्रान्ति की तरफ से हार्दिक बधाई एवं नव वर्ष की शुभकामनाये । ...

21 दिसंबर 2014

पप्पू का घड़ी


क्या चैन लेने देती है घड़ी
सोचता हूँ, नहीं! नहीं!
जब सोता हूँ तो,
उठने का समय बताती है घड़ी ।
जब उठता हूँ तो,
स्कूल जाने के समय बताती है घड़ी ।
क्या चैन लेने देती है घड़ी
सोचता हूँ, नहीं! नहीं!
जब खेलता हूँ तो,
घर वापस जाने की याद दिलाती है घड़ी ।
जब घर आता हूँ तो,
टीवी देखने की याद दिलाती है घड़ी ।
क्या चैन लेने देती है घड़ी
सोचता हूँ, नहीं! नहीं!
जब टीवी देखता हूँ तो,
पढ़ने का समय बताती है घड़ी ।
जब पढ़ता हूँ तो,
दोस्तों से मिलने का समय बताती है घड़ी ।
क्या चैन लेने देती है घड़ी
सोचता हूँ, नहीं! नहीं!
जब दोस्तों से मिलता हूँ तो,
माँ की याद दिलाती है घड़ी,
कि जल्दी घर आना ।
पर जब  घर पहुँचने में लेट होती है,
माँ डाँट सुनाती है , सोचता हूँ
काश ये घड़ी न होती ।
चैन से सोता ।
चैन से उठता ।
चैन से खेलता ।
चैन से टीवी देखता ।
चैन से पढ़ता ।
                  जे.पी. हंस






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें