सेवा में,
1. महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार, नई दिल्ली
2. माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली
3. राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली
4. मानव संसाधन एवं विकास मंत्री, भारत सरकार
5. क्षेत्रीय निर्देशक, कर्मचारी चयन आयोग, नई दिल्ली
महोदय,
निवेदनपूर्वक आपका ध्यान इस विषय की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ जिससे हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी के साथ अनुचित व्यवहार ही नहीं, वरन राष्ट्रीय अपमान भी हो रहा है । महोदय, कर्मचारी चयन आयोग, जिसका मुख्यालय सीजीओ कम्पलेक्स, लोदी रोड, नई दिल्ली में है । जिसकी देश भर में चार-पाँच क्षेत्रीय शाखाएं है । वह देश भर के लिए कर्मचारियों की भर्ती करती है । कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रति वर्ष आशुलिपिक हिन्दी ग्रेड-डी और ग्रेड-सी की भर्ती की जाती है, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस आशुलिपिक हिन्दी के पद की भर्ती के पाठ्यक्रम में हिन्दी से एक भी प्रश्न तक पूछा नहीं जाता है । इसके पाठ्यक्रम है- अंग्रेजी-100 अंक, सामान्य अध्ययन- 50 अंक, रिजनिंग-50 अंक । क्या यह हिन्दी भाषी छात्रों को इस पद पर बहाली से दूर रखने का कही षड्यंत्र तो नहीं ? या वे अन्य भाषा को बढ़ावा देना चाहते है? क्या वे हिन्दी दिवस पर केवल गोष्ठियाँ और सप्ताह मनाकर अपने कर्तव्य की ईतिश्री नहीं कर रहे हैं ? क्या यह हिन्दी का अपमान नहीं है कि हिन्दी आशुलिपिक की भर्ती किये जाए और उसमें एक भी प्रश्न हिन्दी से पूछे नहीं जाए ? क्या यह बेहतर नहीं होता कि हिन्दी और अंग्रेजी आशुलिपिक दोनों पद के लिए पाठ्यक्रम में हिन्दी-50 अंक, अंग्रेजी-50 अंक, सामान्य अध्ययन- 50 अंक, रिजनिंग-50 अंक होता । या हिन्दी आशुलिपिक के हिन्दी-100, अंग्रेजी आशुलिपिक के लिए अंग्रेजी-100 और दोनों के लिए सामान्य अध्ययन- 50 अंक, रिजनिंग-50 अंक हो ।
साथ ही साथ इस तरफ भी ध्यान आकृष्ट करूँ कि कर्मचारी चयन आयोग देशभर में मैंट्रिक लेबल परीक्षा, इन्टर लेबल परीक्षा और स्नातक लेबल परीक्षा आयोजित करती है, लेकिन यहाँ हिन्दी भाषा के साथ इतना भेदभाव है कि इनमें से किसी भी लेबल के परीक्षा में एक भी अंक हिन्दी भाषा से जुड़े प्रश्न नहीं होते हैं । क्या यह राष्ट्रभाषा हिन्दी के साथ अन्याय नहीं है कि केन्द्रीय भर्ती बोर्ड द्वारा इस तरह के भेदभाव किए जाए और उसके नाक के तले बैठे हमारे नीति-नियंता चुपचाप देखते रहे ? क्या केवल हिन्दी दिवस पर देशभर में गोष्ठियाँ और हिन्दी-सप्ताह मनाने से राष्ट्रभाषा अपने मुकाम तक पहुँच सकती है, इस बात पर विचार किया जाए ।
कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली कुछ परीक्षाएं और उनके पाठ्यक्रम इस प्रकार हैः-
मैट्रिक स्तरीय प्रथम परीक्षा-गणित-50 अंक, सामान्य अध्ययन- 50 अंक, रिजनिंग-50 अंक
द्वितीय परीक्षा-अंग्रेजी-50 अंक
इन्टर स्तरीय
पद- क्लर्क, डाटा इन्ट्री ऑपरेटर प्रथम परीक्षा-गणित-50 अंक, सामान्य अध्ययन- 50 अंक, रिजनिंग-50 अंक, अंग्रेजी-50 अंक
द्वितीय परीक्षा-टाईपिंग टेस्ट
इन्टर स्तरीय
पद- आशुलिपिक हिन्दी व अंग्रेजी प्रथम परीक्षा- अंग्रेजी-100 अंक, सामान्य अध्ययन- 50 अंक, रिजनिंग-50 अंक
द्वितीय परीक्षा-शॉर्टहैंड का टेस्ट
स्नातक स्तरीय प्रथम परीक्षा-गणित-50 अंक, सामान्य अध्ययन- 50 अंक, रिजनिंग-50 अंक, अंग्रेजी-50 अंक
द्वितीय परीक्षा गणित-100, अंग्रेजी-100
तृतीय परीक्षा-टाईपिंग टेस्ट व इंटरभ्यू (पदानुसार)
अतः इस संबंध में भारतवर्ष के एक नागरिक होने के नाते मेरा कर्तव्य है कि भारतीय संविधान में उल्लेखित हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी की अस्मिता और गरिमा को बरकरार रखने हेतु आपका ध्यान दिलाऊँ । कर्मचारी चयन आयोग द्वारा संचालित उपरोक्त परीक्षाओं के पाठ्यक्रमों में हिन्दी को शामिल करें, ताकि राष्ट्रभाषा हिन्दी का विकास हो, हिन्दी का उत्थान हो, हिन्दी भाषियों के साथ न्याय हो ।
आपका भारतवासी,
जयप्रकाश नारायण
ग्राम-दनियाला (पश्चिमी)
डाकघर- शादीपुर
जिला-अरवल (बिहार)
ईमेल- jpn.nsu@gmail.com
ब्लॉग- www.jphans.blogspot.com