सुविचार

होली के शुभ अवसर पर शब्द क्रान्ति की तरफ से हार्दिक बधाई एवं नव वर्ष की शुभकामनाये । ...

19 अक्तूबर 2014

चूहें पर टैक्स

प्रधानमंत्री ने दुखड़ा सुनाया,
राजस्व घट रही है , क्या किया जाए ?
अधिकारियों ने बताया सर,
किसी और पर टैक्स लगाया जाए ।
बजट का सत्र आया ।
वितमंत्री ने फरमान सुनाया ।
आदमी पर टैक्स लगाते-लगाते थक गया हूँ
अब चूहों पर टैक्स लगेगा ।
आदमी सुस्त पड़ गया है
चूहों  से आमद बढ़ेगा ।
यह बात जब चूहों तक आई
सबने एकाएक मिटिंग बुलाई ।
नेता लोग सेठिया गया है
अब हम पर ही टैक्स लगा रहा है ।
अरे हमारी आमदनी ही क्या है ?
जिस पर टैक्स लगाई जाए ।
हम तो दूसरों के घर जाते हैं
जो मिलता है वही खाकर रह जाते हैं ।
कोई उपाय नहीं सूझ रहा था
क्या किया जाए ।
चलो सब मिलकर,
जंतर-मंतर पर धरना दिया जाए ।
संसद में बहस हो रही थी ।
कैसे और किस तरह लगाई जाए ।
बाहर धरना-प्रदर्शन हो रहा था ।
नारे लग रहे थे, वित्त मंत्री हाय हाय...
चूहों पर टैक्स लगा रहे हो
पहले अपनी दो सफाई
कोई और नहीं बचा है
मेरी वो हरजाई ।
संसद में कृषि मंत्री ने कहा-
चुहा हमारा गेहूँ खा जाता है
बचता है वो अपने घर ले जाता है
इनके यहाँ बहुत अघोषित सम्पत्ति है ।
इन्हीं पर टैक्स लगाया जाए ।
चुहों ने कहाँ,
ये तो हमारा अघोषित सम्पत्ति है ।
तुम्हारा जो स्विस बैंक में जमा है वो क्या स्वपोषित सम्पत्ति है ।

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